
बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बेटों प्रतीक और करण भूषण इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में हैं। उनके एक के बाद एक सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकातों ने न केवल राजनीति के गलियारों में हलचल मचाई, बल्कि मंत्री बनने की चर्चाओं को भी हवा दे दी।
लेकिन क्या ये मुलाकातें सिर्फ एक फॉर्मल विजिट हैं, या फिर कुछ बड़ा होने वाला है?
सीएम योगी से मुलाकात: कोई राजनीति नहीं!
प्रतीक भूषण का कहना है कि उनकी सीएम योगी से कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई, लेकिन फिर भी हर मुलाकात के बाद “मंत्री बनने” की अफवाहें गर्म हो जाती हैं।
अब यह तो हम सभी जानते हैं कि यूपी की राजनीति में “मुलाकातें” बहुत कुछ बता देती हैं। वैसे भी, जब “भूषण” नाम जुड़ा हो, तो चर्चाएं तो होनी ही थीं।
प्रतीक भूषण के मंत्री बनने की अफवाहें: सच या सियासी साजिश?
एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार प्रतीक और करण भूषण का सीएम योगी से मिलना यह संकेत दे सकता है कि पार्टी में उनकी जिम्मेदारियों को लेकर कुछ बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
क्या प्रतीक भूषण मंत्री बनने के एक कदम और करीब हैं? इसका जवाब फिलहाल नहीं मिल रहा, लेकिन जो चर्चा हो रही है, वो इसे ज्यादा मुमकिन बनाती है।
यूपी में राजनीति का नया ‘फैशन’
“क्या नेता बनने के लिए सीएम से मुलाकात जरूरी है? प्रतीक और करण भाई, हमें भी दिखा दो कि सीएम से मिलने का ‘पास’ कैसे मिलता है?”
चाहे वो प्रतीक भूषण हों या किसी और के बेटे, मुलाकात की एक पुरानी राजनीतिक रिवायत तो बन ही गई है। इस बीच सीएम योगी से मिलकर अगर कोई मंत्री बन जाता है तो हैरान मत होइएगा, क्योंकि यूपी में “मुलाकातें” अब पूरी राजनीतिक फैशन स्टेटमेंट बन चुकी हैं।

आखिर क्यों हो रही हैं मुलाकातें?
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प्रतीक भूषण की बढ़ती छवि: लखनऊ में उनकी मुलाकातों को लेकर लगातार बढ़ रही चर्चाएं यह संकेत दे रही हैं कि वह यूपी राजनीति में कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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बृजभूषण शरण सिंह का प्रभाव: बृजभूषण शरण सिंह, जो बीजेपी के पुराने प्रभावशाली नेता रहे हैं, का परिवार लगातार राजनीतिक मामलों में सक्रिय रहा है। उनके बेटों के सीएम से संपर्क में आना पार्टी की अंदरूनी राजनीति में बदलाव का संकेत हो सकता है।
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सीएम योगी का सॉफ्ट कार्नर: यूपी में सीएम योगी की ‘सॉफ्ट पॉलिटिक्स’ को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता, वे पार्टी के पुराने चेहरों को महत्व देते हैं।
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